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निपात किसे कहते हैं | nipat kise kahate hain

निपात किसे कहते हैं
निपात किसे कहते हैं

 निपात  किसे कहते है ? 

 'निपात ' अनेकार्थीवाची शब्द है। कष्क के अनुसार ''उच्चावच्चेषु अर्थेषु निपतन्तीति निपात '' निपात वस्तुतः पाद का पूरण करने वाला होता है। '' निपात पादपूरण ''इसी को लक्ष्य करके डॉ दीमशिप्त ने लिखा है कि '' निपात ऐसे सहायक शब्द है, जो शब्दों, शब्द-बँधो और पूरे वाक्यों तक को अतिरिक्त अर्थच्छटाएँ प्रदान करते है

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ek kaam karo | एक काम करो

 इक काम करो 

ek kaam karo
एक काम करो 
                                        
खाते जो हो तो माटी है,आँगन भी ये कर जाती है। 
नित नीर भी है, तो चीर भी है, गर इसकी तुम पहचान करो। 
कुछ और न हो जो दे पाओ, इस देश को तुम इक काम करो।। 

जब सरहद वाले पतझड़ में ,दूर कही उस सीमा पर,
कदमो को जैसे काठ किए,आँखों को मानो टाक दिए,
फिर धीरे-धीरे,तिनका-तिनका, भारत की गरिमा पर,
सब कुछ जिसने है वार दिया, उन वीरो का सम्मान करो। 
कुछ और न हो जो दे पाओ, इस देश को तुम इक काम करो।

और लहराती इन फसलों में,हरे भरे  जो मीत सजे, 
कहे फड़ -फड़  करती चिड़िया, तो नन्ही सी घर की गुड़िया भी,
ये देश जहा रंग सादा भी, शांति का पावन रीत लगे, 
और देकर अपना कतरा -कतरा,रंगो से लिपटी चादर में,
इक शहीद ने है कमाया,जो उस केसरी का अभिमान करो। 
कुछ और न हो जो दे पाओ, इस देश को तुम इक काम करो।। 

जब छिप करके किवाड़ों से, मौसम बरसाती जाड़ो में,
कभी होती है अनजाने में, कभी सहकर ताका झांकी भी,
क्यों लिखते हो ? ये नादानी तुम,दिल के उन अखबारों में,
और लिखते-लिखते सपनो की, दुनिया में जो तुम खो जाओ, 
हर बार नहीं इक बार सही है, इस देश को तुम मेरी जान करो।  
कुछ और न हो जो दे पाओ, इस देश को तुम इक काम करो।

क्या देखी तुमने छीना झपटी और ठग की दुनिया दारी भी, 
हां रंग भरे इस महफ़िल में,होती सच्ची है यारी भी, 
पर क्या होगा इन सबका, जो तुम अक्षर-अक्षर न लिख पाए, 
और मन मौजी इस दुनिया के, आगे जोना तुम टिक पाए,
ये स्याही वाली कूची-काठी,इनको तुम हथियार करो, 
फिर होगा सब कुछ अच्छा-अच्छा,गर शिक्षा को आधार करो,
और निसदिन तुमसे पूछेजो, कोई इस देश की राज,
बड़े शान से भी तुम कह पाओ, कुछ ऐसा भी अंजाम करो। 
कुछ और न हो जो दे पाओ, इस देश को तुम इक काम करो।
       ****
कवि 
श्री महेश कुमार बिश्वाश 








how to choose turning point in life | जीवन में टर्ननिंग प्वाइंट कैसे चुने

 जीवन में टर्ननिंग प्वाइंट कैसे चुने

जीवन में टर्ननिंग प्वाइंट कैसे चुने
जीवन में टर्ननिंग प्वाइंट कैसे चुने

जीवन में टर्ननिंग प्वाइंट कैसे चुने

नमस्कार मित्रों 

आज हम बात करेंगे एक ऐसे विषय पर जो कि हर व्यक्ति के जीवन में एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है। हमारा आज का विषय है " जीवन में टर्निंग प्वाइंट कैसे लाएं अर्थात जीवन में बदलाव कैसे लेकर आए...

हर व्यक्ति अपने जीवन को जीने के लिए व उसे सुचारू रूप से गतिशील बनाए रखने के लिए तरह तरह के नियमों एवं उपायों को अपनाता है , जिससे वह अपने जीवन को प्रस्नता पूर्वक  व्यतीत करता है । तो चलिए आज हम जानते है कुछ ऐसे ही नियम एवं उपाय जिसे अपनाकर हम अपने जीवन के हर लम्हें को कुशलतापूर्वक जी सकें ।

जीवन को खुशहाल व गतिशील बनाए रखने के लिए कुछ नियम व बदलाव हर किसी को अपनाना चाहिए जिससे कि वे अपने जीवन का भरपूर आनंद ले सके आइए हम आगे देखते है कि वे कौन कौन से बदलाव है जिनसे हम अपनी ज़िन्दगी को बेहतर से बेहतर बना सकते है ।

जीवन में बदलाव लाने वाले कुछ महत्वपूर्ण बिंदु -:

1- सकारात्मक विचारों को अपनाकर

2- बुरी आदतों का त्याग 

3- जीवन का लक्ष्य 

4- नकारात्मक लोगो से दूरी 

5- एक उचित दिनचर्या 

ये कुछ महत्वपूर्ण बिंदु है जिसे अपनाकर हम अपने आगामी जीवन को और अधिक खुशहाल व आनंदमय बना सकते है...आइए हम इन बिंदुओं पर पूर्ण रूप से जानकारी प्राप्त करें । और जानने का प्रयास करें कि किस तरह से हम इन नियमों को अपनाकर अपने जीवन में एक नई ऊर्जा और बदलाव कैसे लाएं।

1- सकारत्मक विचारों को अपनाकर -: 

हमारा पहला बिंदु है सकारत्मक विचारों को अपनाना जिससे हम अपने जीवन में एक अच्छा बदलाव ला सकते है लेकिन अब सबसे बड़ा प्रश्न ये उठता है कि हम इसे कैसे और किस प्रकार से अपने जीवन में अपना सकते है। सकारत्मक विचार हमें एक आनंदमय व खुशहाल जिंदगी जीने के लिए प्रेरित करती है तथा इसके साथ ही हमारे जीवन में कई सकारत्मक बदलाव आते है। हम सकारत्मक चिंतन करके व सकारत्मक लोगों के संपर्क में रहकर सकारत्मक विचारों को सरलता पूर्वक अपना सकते है तथा इसके साथ ही जीवन के कई सफलताओं को प्राप्त कर अपने जीवन में एक नई ऊर्जा व सकारातमकता ला सकते है।इसलिए हम कह सकते है कि लाइफ में टर्ननिग प्वाइंट लाने के लिए सकारत्मक विचारों का होना अति आवश्यक है। 

2- बुरी आदतों का त्याग -: 

जिस प्रकार हम साकारात्मक विचारों को अपनाकर अपने जीवन में एक नई ऊर्जा व बदलाव ला सकते है उसी प्रकार बुरी आदतों को स्वीकार करके भी हम अपने जीवन में बदलाव ला सकते है। अब हमारे सामने प्रश्न ये उठता है कि वे कौनसी बुरी आदतें है जिनका त्याग कर हम अपने जीवन में एक नया बदलाव लेकर आ सकते है। तो चलिए हम जानते है उन बुरी आदतों के बारे में...

(क) हमारे जीवन की कुछ बुरी आदतें -:
(ख) गलत वस्तुओं का सेवन 
(ग) दिनचर्या के साथ कार्य को नहीं करना 
(घ) अपने कार्य के प्रति जागरूकता नहीं रखना 
(च) अपशब्दों का प्रयोग करना 
(छ) गलत मित्रों के साथ तालमेल रखना 

ये कुछ बुरी आदतें है हमारे जीवन की जिसका त्याग कर हम अपने जीवन में एक बहुत बदलाव ला सकते है तथा अपने जीवन को खुशहाल बना सकते है। अतः जीवन में टर्न्निंग प्वाइंट लाने के लिए बुरी आदतों का त्याग करना भी जरूरी है। 

3- जीवन का लक्ष्य -: 

जीवन में साकारात्मक विचारों को अपनाकर व बुरी आदतों का त्याग करने के साथ ही साथ जीवन में लक्ष्य को तय करके चलने से भी हम अपने जीवन में बदलाव ला सकते है, क्यूंकि जब हम अपने लक्ष्य को अपने जीवन तय करके आगे बढ़ते है तो उस लक्ष्य की प्राप्ति में हमें सफलता मिलना शत प्रतिशत तय होता है कि हम अपने जीवन में अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते है। तथा समाज अपनी एक नई पहचान बना सकते है। इसलिए हर व्यक्ति को चाहिए कि वे अपने जीवन के लक्ष्य को तय करके अपने जीवन में आगे बढ़े जिससे उन्हें सफलता प्राप्ति कम कठिनाइयों से गुजरना पड़ता है और वे आसानी से सफलता है शिखर पर पहुंच सकते है। इसलिए हमें अपने जीवन बदलाव लाने के लिए व सफलता प्राप्त करने के लिए अपने जीवन के लक्ष्य को पहले से ही तय करके आगे कदम उठाने चाहिए। जीवन में टर्निंग प्वाइंट लाने के लिए जीवन का लक्ष्य निर्धारित होना भी आवश्यक है ।

4- नकारात्मक लोगों से दूरी -:

 हमें अपने जीवन में एक सकारत्मक बदलाव लाने के लिए सकारत्मक विचारों को अपनाने के साथ ही साथ नकारात्मक लोगों से दूरी रखना भी उतना कि आवश्यक है जितना जीवन में सकारत्मक विचारों को अपनाना, क्यूंकि नकारात्मक व्यक्ति के संपर्क में रहने से हमारे अंदर नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती है जिससे हमारे अंदर नकारात्मक विचार स्वयं ही आने लगते है। इसलिए हमें नकारत्मक लोगों से दूरी बनाकर रखना चाहिए व उनके संपर्क में आने से बचना चाहिए ताकि जिससे उनके नकारात्मक सोच का असर हमारे जीवन पर न पड़ सके। इस प्रकार नकारात्मक लोगों से जितना हो सके उतना दूर रहकर हम अपने जीवन में एक बदलाव लकर अपने जीवन को और अधिक सरल व खुशहाल बना सकते है। नकारात्मक लोगों से दूरी भी जीवन में टर्निंग प्वाइंट के लिए महत्वपूर्ण है।

5- एक उचित दिनचर्या -: 

हम अपने जीवन में कितनी भी अच्छी चीजों को क्यों ना अपना ले लेकिन यदि हमारे पास एक उचित दिनचर्या नहीं है तो हमारे जीवन में बदलाव नहीं आ सकता। क्यूंकि एक उचित दिन चर्या ही हमें अपने कार्य के प्रति जागरूक बनाती है तथा एक उचित दिनचर्या से ही हम समय का सद उपयोग कर अपने जीवन में एक सकारत्मक बदलाव ला सकते है। अब प्रश्न ये उठता है कि हम किस प्रकार से एक सही व उचित दिनचर्या को अपनाकर अपने जीवन में बदलाव ला सकते है । नीचे कुछ ऐसे ही बिंदु है जिसको अपनाकर हम अपनी दिनचर्या को बेहतर बना सकते हैं-:

1- समय पर सोना व समय पर उठना एक अच्छी दिनचर्या में आता है ।
2- अपने कार्य को समय पर पूर्ण करना। 
3- समय पर भोजन आदि करना ।
4- अपने सभी कार्यों को करने के लिए एक उचित समय व समय सीमा को ध्यान में रखना ।
5- समय के अनुसार अपनी दिनचर्या में फेर बदल करते रहना ताकि रोज हमें एक अच्छी दिनचर्या प्राप्त हो सकें। 

ये कुछ महत्वपूर्ण बातें है, जिनको ध्यान में रखकर हम अपनी दिनचर्या को बेहतर बना सकते है तथा साथ ही अपनी ज़िन्दगी में एक सकारत्मक बदलाव भी ला सकते है। इसप्रकर एक उचित दिनचर्या भी जीवन में टर्निंग प्वाइंट ला सकता है। 

इस प्रकार ये कुछ महत्वपूर्ण बिंदु थे जिनका जिक्र हमने पूर्ण रूप से आपके समक्ष किया । जिसे अपनाकर व ध्यान में रखकर हम लोग अपनी ज़िन्दगी में एक नई ऊर्जा के साथ ही साथ एक सकारत्मक परिवर्तन भी ला सकते है । ये परिवर्तन हमारे जीवन उत्साह, खुशहाली , सफलता व निरंतर गातिमान रहने के लिए अति महत्वपूर्ण माने जाते है। इन्हें अपनाकर हम एक स्वस्थ जीवन के साथ साथ एक सफल व सकारत्मक जीवन भी प्राप्त कर सकते है। इसलिए इन नियमों को समाज के हर व्यक्ति चाहे वे किसी भी युवा वर्ग के हो सभी को अपनाना चाहिए जिनसे उनके जीवन में सकारात्मकता के साथ साथ सफलता का भी आगमन होता है। और इन्हें अपनाकर हर व्यक्ति अपने जीवन के सभी सुखों का आनंद प्राप्त करने में सक्षम रहता है। 

निष्कर्ष -: 

अंततः हम कह सकते है कि एक सफल जीवन व्यतीत करने के लिए व जीवन को सुखदाई बनाने के लिए जीवन में सकारत्मक विचारों को अपनाना, सकारत्मक लोगों के संपर्क में रहना, जीवन का लक्ष्य निर्धारित होना,नकारात्मक लोगों से दूरी बनाकर रखना व एक उचित दिनचर्या का होना अति आवश्यक है। जिन्हें अपनाकर हम अपने जीवन में एक नया बदलाव व एक नई ऊर्जा ला सकते हैं। व जीवन के सभी पलों को खुलकर सफलता के साथ व्यतीत कर सकते है। अंततः हम कह सकते है कि जीवन में टर्निंग प्वाइंट लाने के लिए इन सभी बिंदुओं को अपनाना अति आवश्यक है ।

इस प्रकार जीवन में टर्निंग प्वाइंट कैसे लाए इस विषय पर हमारी चर्चा पूर्ण होती है मैंने आशा करता हूं कि मेरे द्वारा दी गई जानकारी आपके जीवन में एक नया बदलाव लाने के साथ साथ उपयोगी हो । व इससे आपके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आए। जीवन में टर्निंग प्वाइंट कैसे लाए विषय पर हमारी ये चर्चा यही समाप्त होती है। 

                                                          जय हिन्द, जय भारत


acharya hazari prasad dwivedi ka jeevan paricha | आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का जीवन परिचय

आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का जीवन परिचय

आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का जीवन परिचय
आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी


आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का जीवन परिचय

आचार्य हज़ारी प्रसाद द्विवेदी जी का जन्म सन 1907 ई० में बलिया जिले के दुबे का छपरा नामक ग्राम में हुआ था। इनके पिता का नाम श्री अनमोल द्विवेदी एवं माता का नाम श्रीमती ज्योतिषमति था।

इनकी शिक्षा का प्रारम्भ संस्कृत से हुआ। इंटर की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद इन्होने काशी हिन्दुविश्विद्यालय से ज्योतिष तथा साहित्य में आचार्य की उपाधि प्राप्त की। 

सन १९४० ई० में हिंदी एवं संस्कृत के अध्यापक के रूप में शांति निकेतन चले गए।  यही इन्हे विश्वकवि रविंद्रनाथ टैगोर का सानिध्य मिला और साहित्य सृजन की ओर अभिमुख हो गए।  

१९५६ ई० में काशी विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में अध्यक्ष नियुक्त हुए।  कुछ समय तक पंजाब विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया। सन १९४९ ई० में लखनऊ विश्वविद्यालय ने इन्हे 'डी० लिट०' तथा सन  १९५७ ई० में भारत सरकार ने 'पदमभूषण' की उपाधि से विभूषित किया। १८ मई, १९७९ ई० को इनका देहावसान हो गया। 

आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का साहित्यिक परिचय

आचार्य द्विवेदी जी ने बाल्यकाल से ही श्री व्योमकेश शास्त्री से कविता लिखने की कला सीखनी आरम्भ कर दी थी। शांति-निकेतन पहुंचकर इनकी प्रतिमा और और अधिक निखारने लगी। कवीन्द्र रविंद्र का इन पर विशेष प्रभाव पड़ा। 

बांग्ला साहित्य से भी ये बहुत प्रभावित थे। ये उच्चकोटि के शोधकर्ता, निबंधकार, उपन्यासकार एवं आलोचक थे।  सिद्ध साहित्य, जैन  साहित्य एवं अपभ्रंश साहित्य को प्रकाश में लाकर तथा भक्ति-साहित्य पर उच्चस्तरीय समीक्षात्मक ग्रंथो की रचना करके इन्होने हिंदी साहित्य की महान सेवा की। 

वैसे तो द्विवेदी जी ने अनेक विषयो पर उत्कृष्ट कोटि  निबंधों एवं नवीन शैली पर आधारित उपन्यासों की रचना की है, पर विशेष रूप से वैयक्तिक एवं भावात्मक निबंधों की रचना करने में ये अद्वितीय रहे। 

 द्विवेदी जी 'उत्तर प्रदेश ग्रन्थ अकादमी' के अध्यक्ष और 'हिंदी संस्थान'  उपाध्यक्ष भी रहे।  कबीर पर उत्कृष्ट आलोचनात्मक कार्य करने के कारण  इन्हे 'मंगलात्मक' पारितोषिक प्राप्त हुआ।  इसके साथ हे 'सूर-साहित्य' पर 'इंदौर-साहित्य समिति' ने 'स्वर्ण-पदक' प्रदान किया। 

आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी की रचनाएँ

द्विवेदी जी की प्रमुख कृतियाँ इस प्रकार है -

निबंध-   'कुटज', 'साहित्य के साथी', 'कल्पलता', 'विचार-प्रवाह', 'आलोक पर्व' , 'विचार और वितर्क', 'कल्पना', 'अशोक के फूल' आदि। 

उपन्यास - 'पुननर्वा', 'बाणभट्ट की आत्मकथा', 'चारु चन्द्रलेख', 'अनामदास का पोथा' 
आलोचनात्मक साहित्य - 'सूर-साहित्य', कबीर', 'सूरदास और उनका काव्य', 'हमारी साहित्यिक समस्याए', 'हिंदी साहित्य की भूमिका', 'साहित्य का साथी', 'साहित्य का धर्म', 'हिंदी-साहित्य', 'समीक्षा-साहित्य', 'नख-दर्पण में हिन्दी-कविता', 'साहित्य का मर्म', 'भारतीय वाड्मय', 'कालिदास की लालित्य-योजना' आदि। 

शोध साहित्य - 'प्राचीन भारत का कला विकास', 'नाथ संप्रदाय', 'मध्यकालीन धर्म साधना', 'हिंदी-साहित्य का आदिकाल' आदि। 

अनुदित साहित्य - 'प्रबंध चिंतामणि', 'पुरातन-प्रबंध-संग्रह', 'प्रबंधकोश', 'विश्व परिचय', मेरा बचपन', 'लाल कनेर' आदि। 

सम्पादित साहित्य - 'नाथ-सिद्धो की बाणिया', 'संक्षिप्त पृथ्वीराज रासो', 'सन्देश-रासक' आदि। 
भाषा-शैली - द्विवेदी जी भाषा के प्रकांड पंडित थे। संस्कृतनिष्ट शब्दावली के साथ साथ आपने निबंधों में उर्दू, फ़ारसी, अंग्रेजी एवं देशज शब्दों का भी प्रयोग किया है।  

इनकी भाषा प्रौढ़ होते हुए बी सरल, सयंत तथा बोधगम्य है।  मुहावरेदार भाषा का प्रयोग भी इन्होने किया है।  विशेष रूप इनकी भाषा शुद्ध संस्कृतनिष्ट साहित्यिक खड़ीबोली है।  इन्होने अनेक शैलियों का प्रयोग विषयनुसार किया है , जिनमे प्रमुख है-गवेषणात्मक शैली, आलोचनात्मक शैली, भावात्मक शैली, हास्य-व्यंगात्मक शैली, उद्धरण शैली। 

गुरुनानक देव में मानवतावादी मूल्यों  सहज सन्निवेश पाने के लिए द्विवेदी जी भाव- पेशट ही गए है।  प्रस्तुत निबंध 'गुरु नानकदेव ' में निबंध की समस्त विशेषताए उपस्थित है।  इस निबंध में स्थान स्थान पर उपमा, रूपक एवं उत्प्रेक्षा अलंकारों का प्रयोग लेखक ने किया है। 
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basic excel formulas | बेसिक एक्सेल फॉर्मूला

बेसिक एक्सेल फॉर्मूला


basic excel formulas

 बेसिक एक्सेल फॉर्मूला 

शुरुआती विश्लेषण के लिए वित्तीय विश्लेषण में अत्यधिक कुशल बनने के लिए बुनियादी एक्सेल फॉर्मूलों को बदलना महत्वपूर्ण है।MS Excel को डेटा विश्लेषण में सॉफ़्टवेयर का उद्योग मानक माना जाता है। MS Excel का स्प्रेडशीट प्रोग्राम भी निवेश बैंकरों और डेटा प्रोसेसिंग, वित्तीय मॉडलिंग और प्रस्तुति में वित्तीय विश्लेषकों द्वारा सबसे पसंदीदा सॉफ़्टवेयर में से एक होता है। यह मार्गदर्शिका बुनियादी एक्सेल फ़ंक्शन का अवलोकन और सूची प्रदान करेगी।

एक्सेल में बुनियादी शर्तें

1. Formulas

एक्सेल में, एक सूत्र एक अभिव्यक्ति है। जो सेल की एक श्रेणी में मूल्यों पर काम करता है।

2. Functions

एक्सेल में कार्य पूर्वनिर्धारित सूत्र के अनुसार होता हैं। वे मानव-अनुकूल नाम देते हुए सूत्रों की श्रमसाध्य मैनुअल प्रविष्टि को समाप्त करते हैं।

एक्सेल में पांच समय बचाने वाले तरीके

डेटा का विश्लेषण करते समय, बुनियादी एक्सेल फ़ार्मुलों को सम्मिलित करने के पाँच सामान्य तरीके हैं। प्रत्येक मुख्य सूत्रों को लगाने से पहले, हम उन तरीकों को स्पष्ट करेंगे, जिससे आप पहले से अपना पसंदीदा फार्मूला प्रयोग सकें।

1. Typing a formula inside the cell

किसी cell या सूत्र पट्टी में सूत्र टाइप करने का सबसे सरल तरीका है। प्रक्रिया आमतौर पर नाम के बाद एक = चिह्न टाइप करके शुरू होती है। एक्सेल इसमें काफी बुद्धिमान है कि जब आप फ़ंक्शन का नाम लिखना शुरू करते है, तो एक पॉप-अप फ़ंक्शन संकेत करता है। इस सूची में से आप अपनी प्राथमिकता का चयन करेंगे। हालाँकि, Enter कुंजी दबाएँ नहीं। इसके बजाय, टैब कुंजी दबाएं ताकि आप अन्य विकल्पों को सम्मिलित करना जारी रख सकें। अन्यथा, आपसे गलती हो सकती है।

2. Using Insert Function Option from Formulas Tab

यदि आप अपने फ़ंक्शंस प्रविष्टि का पूर्ण नियंत्रण चाहते हैं, तो एक्सेल इन्सर्ट फंक्शन डायलॉग बॉक्स का उपयोग करने की आवश्यकता है। इसे प्राप्त करने के लिए, सूत्र टैब पर जाएं और सम्मिलित करें फ़ंक्शन लेबल वाला पहला मेनू।


3. फॉर्मूला टैब में किसी एक समूह से फॉर्मूला का चयन करना

यह विकल्प उन लोगों के लिए है जो अपने पसंदीदा कार्यों को जल्दी से पूरा करना चाहते हैं। इस मेनू को खोजने के लिए, सूत्र टैब पर जाएँ और अपने पसंदीदा समूह का चयन करें। फ़ंक्शन की सूची से भरा एक उप-मेनू दिखाने के लिए क्लिक करें। वहां से, आप अपनी पसंद का चयन कर सकते हैं। हालाँकि, यदि आप पाते हैं कि आपका पसंदीदा समूह टैब पर नहीं है, तो अधिक कार्य विकल्प पर क्लिक करें - यह शायद वहीं छिपा है।

4. Using AutoSum Option

त्वरित कार्यों के लिए, AutoSum आपके लिए विकल्प है। यह ऑप्शन होम टैब कोने में दये हाथ पर जाएँ, और ऑटोसम विकल्प पर क्लिक करें। फिर अन्य छिपे हुए फॉर्मूले दिखाने के लिए कैरेट पर क्लिक करें। इन्सर्ट फंक्शन विकल्प के बाद यह विकल्प फॉर्मूला टैब पहले विकल्प में भी उपलब्ध है। तकनीक

5. Quick Insert: Use Recently Used Tabs

यदि आप अपने सबसे हाल के फॉर्मूले को एक नीरस कार्य के लिए फिर से टाइप करते हैं, तो हाल ही में उपयोग किए गए मेनू का उपयोग करें। यह फॉर्मूला टैब पर, AutoSum के बगल में एक तीसरा मेनू विकल्प है। 

बेसिक एक्सेल फॉर्मूला

1. SUM 

 
2. AVERAGE 
  
3. COUNT 
 
4. COUNT
 
5. IF 
 
6. TRIM 
 
7. MAX & MIN
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